!!!---: धन की तीन गति :---!!!
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दानं भोगो नाशस्तिस्रो गतयो भवन्ति वित्तस्य ।।
यो न ददाति न भुङ्क्ते तस्य तृतीया गतिर्भवति।।
धन की तीन गतियां मानी गई है :--दान करना, भोग करना और नाश होना । जो व्यक्ति अपने धन का न तो दान करता है और न खुद उसका उपयोग करता है तो उसकी तीसरी गति होती है अर्थात् उस धन का नाश हो जाता है । लेखक--योगाचार्य डॉक्टर प्रवीण कुमार शास्त्री
जैसे शरीर में खून का प्रवाह अच्छा रहने से व्यक्ति का स्वास्थ्य अच्छा रहता है, वैसे ही बाजार में पैसे का प्रवाह चलते रहने से अर्थव्यवस्था का स्वास्थ्य भी बेहतर बनता है। जो लोग पैसा घरों की तिजोरियों में बंद करके रख देते हैं, न सिर्फ अपना नुकसान करते हैं अपितु देश की अर्थव्यवस्था की रफ्तार भी कम करते हैं। पैसे का स्वभाव ही ऐसा है कि वह जितना खर्च होता है, उतना वापस आता है। पैसे को गांठ में बांधने की बजाय ठीक से खर्च करना बेहतर विकल्प है। लेखक--योगाचार्य डॉक्टर प्रवीण कुमार शास्त्री
पैसे को जमा करके रखने वालों की तिजोरी पर सरकार की नजर पड़ती है और सरकार उसे ब्लैक मनी घोषित करके कब्जा कर लेती है । यही तीसरी गति है । इसलिए पैसे का सदुपयोग करें । दूसरों को दान दे, जिसको आवश्यकता है और वह उसका सदुपयोग कर सकें । उसका खुद अपने जीवन पर खर्च करें, अन्यथा तीसरी गति होगी । कोई तीसरा ले जाएगा ।
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लेखक :--- योगाचार्य डॉ. प्रवीण कुमार शास्त्री
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